सटीकता सर्वोपरि — हर ग्रह-स्थिति DE440 से ली जाती है, जो NASA JPL का सर्वाधिक परिशुद्ध ग्रह-गणित है।
सटीकता सर्वोपरि — हर ग्रह-स्थिति DE440 से ली जाती है, जो NASA JPL का सर्वाधिक परिशुद्ध ग्रह-गणित है।
राहु काल हर दिन का लगभग डेढ़ घंटे का वह समय है जिसमें परंपरा कोई नया काम शुरू करने से मना करती है। यह वार के साथ बदलता है, और आपके शहर के सूर्योदय और सूर्यास्त के साथ भी — इसलिए इसे याद रखने के बजाय देख लेना बेहतर है।
गणना हो रही है…
राहु काल दिन के उजाले का ठीक आठवाँ भाग है, इसलिए इसकी लंबाई और इसकी जगह दोनों आपके सूर्योदय और सूर्यास्त के अनुसार चलती हैं। कुछ सौ किलोमीटर दूर के दो शहरों में आधे घंटे का अंतर हो सकता है, और एक ही शहर में साल भर दिन घटने-बढ़ने के साथ यह खिसकता रहता है। जो पन्ना हर वार के लिए एक तय समय छापता है, वह किसी एक शहर के किसी एक दिन का समय बता रहा है। इसीलिए यहाँ पहले जगह पूछी जाती है।
परंपरा का ध्यान घड़ी पर नहीं, शुरुआत पर है। यात्रा तब शुरू होती है जब आप निकलते हैं, ख़रीद तब जब भुगतान होता है, और अनुबंध तब जब उस पर हस्ताक्षर होते हैं। जो काम पहले से चल रहा हो उसे इस समय में शुरू हुआ नहीं माना जाता, इसलिए समय शुरू होते ही चलता काम रोकने की ज़रूरत नहीं — और न ही यह पहले शुरू हुए किसी काम को पीछे जाकर बिगाड़ता है।
दिन के उन्हीं आठ भागों में यमगण्ड और गुलिक काल भी आते हैं, और वार हर एक को अलग भाग देता है — इसलिए तीनों कभी एक-दूसरे पर नहीं पड़ते और दिन में बचने के लिए एक नहीं, तीन समय होते हैं। इन्हीं के बीच दोपहर के आसपास अभिजित मुहूर्त पड़ता है, जो दिन का इकलौता ऐसा समय है जिसे टाला नहीं, खोजा जाता है।
आपकी जन्मकुंडली पर नहीं। किसी दिन किसी शहर में राहु काल सबके लिए एक ही होता है — यही बात इसे देखना आसान बनाती है और यही इसकी सीमा भी है: यह नहीं बताता कि वह दिन आपके लिए अनुकूल है या नहीं। वह अलग सवाल है, जिसका उत्तर आपके जन्म नक्षत्र से गिनकर मिलता है। इसे कितनी सख़्ती से माना जाता है, यह भी बदलता है — दक्षिण भारत में इसका ध्यान सबसे ज़्यादा रखा जाता है, और कहीं-कहीं इसे हल्के में लिया जाता है।
इस पृष्ठ पर दो अलग तरह की बातें हैं। समय गणित है: आपके सूर्योदय और सूर्यास्त के बीच के दिन को आठ बराबर भागों में बाँटकर, वार के अनुसार एक भाग चुना जाता है। उसी सूर्योदय से चलने वाला कोई भी स्रोत उन्हीं मिनटों पर पहुँचेगा — इसीलिए मतभेद प्रायः अलग शहर का होता है, अलग परंपरा का नहीं। यह अवधि अशुभ है, यह परंपरा का पाठ है — बहुत समय से और बहुत लोगों द्वारा माना हुआ, फिर भी माप नहीं, पाठ। पहला यह पृष्ठ ठीक-ठीक देता है; दूसरे को तौलना आपका काम है।
7 अक्टूबर 2026 · बुधवार
12:07 – 13:3612:07 pm – 01:36 pm
1h 30m8 में से भाग 5
| दिन | राहु काल |
|---|---|
8 अक्टूबर 2026 · गुरुवार | 13:36 – 15:0601:36 pm – 03:06 pm1h 29m |
9 अक्टूबर 2026 · शुक्रवार | 10:37 – 12:0610:37 am – 12:06 pm1h 29m |
10 अक्टूबर 2026 · शनिवार | 09:07 – 10:3709:07 am – 10:37 am1h 29m |
11 अक्टूबर 2026 · रविवार | 16:33 – 18:0304:33 pm – 06:03 pm1h 29m |
12 अक्टूबर 2026 · सोमवार | 07:38 – 09:0707:38 am – 09:07 am1h 29m |
13 अक्टूबर 2026 · मंगलवार | 15:03 – 16:3203:03 pm – 04:32 pm1h 29m |
14 अक्टूबर 2026 · बुधवार | 12:05 – 13:3412:05 pm – 01:34 pm1h 29m |
पहला भाग कभी राहु का नहीं होता, इसलिए सूर्योदय के तुरंत बाद का समय राहु काल से मुक्त रहता है — पर यमगण्ड या गुलिक से नहीं, जो कुछ वारों में इसी भाग में पड़ते हैं।